देशी गाय आपको बचा सकती है हृदय रोग से

इंडिया 2डे (आपके साथ)
मध्यप्रदेश। भैंस के दूध के बजाय यदि हम देशी गायों का दूध उपयोग करते हैं तो न केवल स्वस्थ्य रहेंगे बल्कि हृदय रोगों से कोसों दूर रहकर लंबा जीवन प्राप्त करेंगे। इस संदेश को अधिकतम लोगों तक पहुंचाने के लिए विगत दिनों आर्युवेद कंपनी नई दिल्ली के दल ने मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में स्थित वेटरनरी विवि का दौरा कर इस संबंध की जानकारी से उपस्थितजनों को परिचित कराया।
विशेषज्ञों से मिली जानकारी के अनुसार विदेशी गायों के बजाय स्वदेशी नस्ल की गायों का दूध उपयोग से ह़ृदय रोग से बचा जा सकता है। देशी नस्ल की गायों में भैंस के दूध की तुलना में फेट आधा होता है, इसके साथ ही गाय के दूध में के-2 होता है जो हड्डियों तक कैल्शियम को पहुंचाने में सहायक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार गाय का घी प्रतिदिन एक चम्मच खाने से बाईलरी में लिपिड का फ्लो बढ़ जाता है जिससे खून और आंतों में जमा खराब कालेस्ट्रोल खत्म होता है। गाय के घी में एंटी ऑक्सीडेंट पाये जाते हैं, जिससे स्किल हैल्दी, मुलायम और चमकदार होती है।
ये हैं देशी नस्लें व एंटी ऑक्सीडेंट
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देशी नस्ल की गायों में गिर, काठियावाड़, थारपारकर, साहीवाल, निमाड़ी, रैड सिंघी और कांक्रे ज आदि नस्लें प्रमुख हैं। इनमें गिर, साहीवाल, काठियावाड़ और निमाड़ी नस्ल की गायों में के-2 नामक पदार्थ पाया जाता है। जो कि हृ़दय और हड्डियों को मजबूत करता है। इन नस्ल की गायों के दूध में 6 से 7 फीसदी फेट होता है ये लो फेट वाला दूध हृदय रोगों के खतरों से बचाता है।  गाय के घी में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो स्किन को हैल्दी और मुलायम बनाते हैं, विदेशी नस्ल की गायों में होलेस्टीन, फ्र ीजियन और एचएफ प्रमुख हैं किन्तु इनके दूध में एंटी ऑक्सीडेंट नहीं पाए जाते।
उन्नत बनाने के किए जा रहे प्रयास
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पशु संवर्धन के डिप्टी डायरेक्टर डॉ के के चौधरी ने बताया कि देशी नस्ल की गायों को और उन्नत बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैंं ताकि इनका दूध स्वास्थ्य की दृष्टि से और अधिक उपयोगी तथा स्वास्थ्य वर्धक हो सके।