ऐसे मासूम बच्चे, जिनकी आपबीती सुनकर आप भी रो देंगे

इंडिया 2डे न्यूज(आपके साथ)
मध्यप्रदेश। जन्म किसने दिया , पाल-पोष कर बड़ा किसने किया यह नहीं मालूम, कौन हैं माता-पिता इनका भी पता नहीं, किधर है ठिकाना यह भी मालूम नहीं, सबकुछ होने के बावजूद गुमनाम में दर्ज है कुछ ऐसे मासूमों का जीवन जिनका इस दुनिया में केवल कुछ समाजसेवी व संस्थाएं ही परिवार, रिश्तेदार, दोस्त व शिक्षक आदि सबकुछ हैं। दरअसल यह मामला बाल गृह में अपना जीवनयापन कर रहे मासूमों का है। यह बालगृह मध्यप्रदेश के अंतर्गत आने वाले जबलपुर जिले के गोकलपुर क्षेत्र में स्थित है।

कोई स्टेशन पर मिला, तो कोई सड़क पर भीख मांगते हुए और कोई नशे में धुत हालत में गंभीरावस्था में मिला तो वहीं कोई मंदिर की सीढिय़ों में अपना गुजरवसर करते हुए दिखाई दिया। जिनकों चाईल्ड लाईन व शहर के स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा ऐसे मासूमों की परवरिश के लिए बाल गृह में पहुंचाया गया, ताकि ऐसे मासूम अपना बेहतर जीवनयापन कर सकें।

इन मासूमों को केवल अपना व पिता का नाम मालूम है बाकी जानकारी नहीं
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नाम व पिता        पता    परिवार की जानकारी
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सूरज पिता राकेश        अज्ञात    परिवार की कोई जानकारी नहीं
करन पिता प्रकाश        अज्ञात    परिवार की कोई जानकारी नहीं
राहुल पारिया        अज्ञात    परिवार की कोई जानकारी नहीं
कैलाश            अज्ञात    परिवार की कोई जानकारी नहीं
आकाश पिता दिनेश        अज्ञात    परिवार की कोई जानकारी नहीं
आकाश पिता संतोष        अज्ञात    परिवार की कोई जानकारी नहीं
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बेहतर परवरिश के लिए किए जा रहे कार्य
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बाल गृह गोकलपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार बाल गृह में कुछ ऐसे बच्चें हैं, जिनके  संबंध की कोई जानकारी नहीं है, जिनमें से कुछ बच्चों का पता मालूम है, लेकिन उनके परिवार की कोई जानकारी नहीं है। इस वजह से ऐसे बच्चों की परवरिश बाल गृह में करते हुए उनके बेहतर भविष्य का निर्माण करने नैतिक शिक्षा व स्कूली शिक्षा प्रदान की जा रही है, ताकि यह बच्चे बड़े होकर अपने पैरों पर खड़ा हो सकें।

बच्चों के संबंध की नहीं मिल रही जानकारी
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प्रथम न्यायायिक मजिस्ट्रेट अरूण जैन ने बताया कि ऐसे बच्चें जिनके बारे में कुछ जानकारी नहीं है, ऐसे बच्चों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए उनके द्वारा व विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से कार्य किया जा रहा है, लेकिन किसी भी प्रकार की बच्चों की कोई जानकारी न मिलने के कारण ऐसे बच्चे अपनों के होने के बावजूद अपनों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

सभी से की अपील, ताकि मिल सके परिवार
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मजिस्ट्रेट अरूण जैन बताया कि बाल गृह में रह रहे ऐसे कुछ बच्चों को उनके माता-पिता परिवार व अन्य किसी भी प्रकार की कोई जानकारी नहीं है। इसके लिए  स्वयंसेवी संस्था, शहर के नागरिक व सामाजिक कार्यकर्ता आदि आगे आते हुए बच्चों को गोद भी ले सकते हैं, ताकि उन्हें उनका परिवार मिल सके। उन्होंने बताया कि यह बच्चे कहीं न कहीं किसी क्षेत्र से भिक्षावृत्ति व नशा करते हुए मिले थे, जिन्हें बाल गृह में लाकर उनकी परवरिश की जा रही है।