अन्य राज्य से आने वाले यात्रियों के लिये दिशा-निर्देश जारी

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) मध्यप्रदेश। भारत सरकार ने विभिन्न राज्यों में लॉकडाउन के चलते रुके हुए लोगों को अपने गृह राज्यों में वापस भेजने का निर्णय लिया है। इसके लिये हवाई मार्ग से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिये दिशा-निर्देश जारी कर दिये गये हैं। इस निर्णय से मध्यप्रदेश में हवाई मार्ग से मुख्यतः इंदौर एवं भोपाल एयरपोर्ट पर यात्रियों की बहुतायत में आवागमन की संभावना है। गृह, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन सख्ती से सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये हैं। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री फैज अहमद किदवई ने दिशा-निर्देश जारी करते हुए बताया है कि प्रदेश में इन यात्रियों का एयरपोर्ट पर ही मेडिकल परीक्षण किया जाकर आवश्यक कार्यवाही की जायेगी।

हवाई यात्रा से आने वाले यात्रियों के संबंध में जारी दिशा-निर्देश

प्रमुख सचिव श्री किदवई ने निर्देश जारी करते हुए बताया है कि प्रदेश में अन्य राज्यों से हवाई मार्ग द्वारा यात्रा करने वाले यात्रियों द्वारा संबंधित एयरपोर्ट के अराइवल तथा डिपार्चर क्षेत्र में ही चिकित्सकीय जांच एवं स्व-घोषणा पत्र (व्यक्तिगत विवरण सहित फोन नंबर तथा प्रदेश में स्थाई निवास का पता) प्रस्तुत करना और निर्धारित स्वास्थ्य काउंटर पर चिकित्सकीय परीक्षण (थर्मल स्क्रीनिंग) कराना अनिवार्य होगा।

चिकित्सीय परीक्षण के (थर्मल स्क्रीनिंग) दौरान यात्री जिनमें संभावित कोविड-19 के लक्षण पाए जाते हैं, ऐसे यात्रियों का कोविड-19 टेस्ट कराया जाए और जांच में परिणाम नेगेटिव आने पर ही घर भेजा जाए।

यदि कोविड-19 टेस्ट में यात्री पॉजिटिव पाया जाता है तो ऐसे यात्री को अनिवार्य रूप से लक्षणों के आधार पर निर्धारित कोविड केयर सेण्टर अथवा डेडिकेटेड कोविड हेल्थ केयर सेण्टर अथवा संस्थागत आइसोलेशन किया जाना होगा। ऐसी स्थिति में जिले में निर्धारित कोविड केयर सेण्टर अथवा डेडिकेटेड कोविड हेल्थ केयर सेण्टर अपने आइसोलेशन सेण्टर में 10 दिवस के लिए भर्ती किया जाए। निर्धारित 10 दिवस की आइसोलेशन अवधि उपरांत रोगी की चिकित्सा जाँच कर विगत 3 दिन पूर्व से लक्षणविहीन पाए जाने पर उनकी आइसोलेशन अवधि समाप्त की जा सकती है। परन्तु यात्रियों को आगामी 07 दिवस तक होम आइसोलेशन में प्रोटोकाल पालन करते हुए घर पर ही रहने की सलाह देकर भेजा जा सकता है।

जांच अवधि के दौरान यात्रियों को निर्धारित क्वारेंटाइन सेंटर में रखा जाना सुनिधित किया जाए। इन समस्त यात्रियों की सघन निगरानी के लिये उनके मोबाइल फ़ोन में ‘आरोग्य सेतु ऍप’ इंस्टॉल कराया जाए, जिससे मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो सके।

ऐसे यात्री जो एयरपोर्ट के जिले के निवासी नहीं है अथवा किसी अन्य जिलों में प्रस्थान कर रहे है, उन जिलों के कलेक्टरों को सम्बंधित यात्रियों की सूचना प्रदान की जाए।

गाइड-लाइन्स का पालन करते हुए उद्योगों को प्रारंभ करने के निर्देश

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) मध्यप्रदेश।राज्य शासन ने लॉकडाउन-4 के दौरान निर्दिष्ट आदेशों एवं गाइड-लाइन्स का पालन करते हुए उद्योगों को प्रारंभ करने में सभी प्रकार का सहयोग करने के निर्देश जारी किये हैं।प्रमुख सचिव, गृह श्री एस.एन. मिश्रा ने कहा है कि नागरिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे पूरी गंभीरता से जारी गाइड-लाइन्स का पालन सुनिश्चित करेंगे।

रेड जोन्स के संबंध में जानकारी दी गई कि इंदौर तथा उज्जैन जिले का सम्पूर्ण क्षेत्र रेड जोन की श्रेणी में रखा गया है। साथ ही, भोपाल, बुरहानपुर, जबलपुर, खण्डवा तथा देवास नगरपालिक निगम की सीमाओं के अधीन सम्मिलित क्षेत्र एवं मंदसौर, नीमच, धार एवं कुक्षी नगरपालिका की सीमाओं के अधीन सम्मिलित क्षेत्र भी रेड जोन की श्रेणी में होंगे।

पूरे प्रदेश में यात्री बसों का संचालन प्रतिबंधित रहेगा। किन्तु राज्य सरकार द्वारा मजदूरों को परिवहन में लगाई गई बसें और फैक्ट्री संचालन के लिये मजदूरों को लाने-ले जाने वाली बसें इस प्रतिबंध से मुक्त होंगी। फैक्ट्री मजदूरों के लिये पास फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा ही जारी किया जा सकेगा।

रेड जोन में सम्मिलित इंदौर और उज्जैन जिलों के शहरी क्षेत्रों में बाजार/बाजार परिसर भी आगामी आदेश तक बंद रहेंगे किन्तु स्टैण्ड अलोन दुकानें, मोहल्ले की दुकानें, रहवासी परिसर में स्थित दुकानें तथा बाजारों में स्थित आवश्यक वस्तुओं की दुकानें इस प्रतिबंध से मुक्त रहेंगी। नगर निगम भोपाल, बुरहानपुर, जबलपुर, खण्डवा तथा देवास नगरपालिक सीमाओं के अधीन एवं मंदसौर, नीमच, धार एवं कुक्षी (नगर निगम एवं नगरपालिकाओं) की सीमा के बाहर स्थित सभी प्रकार की दुकानें सामान्य स्थिति में खुली रहेंगी।

रेड जोन में स्थित निजी तथा शासकीय कार्यालयों में 50 प्रतिशत की सीमा तक कर्मचारी उपस्थित हो सकेंगे। शासकीय कार्यालयों में अधिकारियों की उपस्थिति शत-प्रतिशत रहेगी। रेड जोन में सब्जी मण्डियों का संचालन एक से अधिक स्थानों में बाँट कर करना होगा। उक्त प्रतिबंधों के अद्यधीन उद्योगों को प्रारंभ करने में सभीी प्रकार का सहयोग किये जाने के प्रयास किये जायें।

आने वाला है एमपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम, उत्तर पुस्तिका की जांच लगभग हो रही है पूरी

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) मध्यप्रदेशएमपी बोर्ड के 10 वीं के छात्रों के लिए राहत भरी खबर है।जनरल प्रमोशन मिलने के बाद जून के पहले सप्ताह में रिजल्ट घोषित होने की उम्मीद है।मंडल के अधिकारियों ने इस ओर संकेत दिए है। चुंकी लॉकडाउन से पहले ली गई परीक्षाओं की कॉपियों का मूल्यांकन काम लगभग पूरा हो चुका है और अब नंबर देने का काम तेजी से चल रहा है।ऐसे में मंडल के अधिकारियों का कहना है कि 10 वीं का रिजल्ट जून के प्रथम सप्ताह में घोषित कर दिया जाएगा।

दरअसल, कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए माध्यमिक शिक्षक मंडल बोर्ड भोपाल द्वारा कक्षा 10वीं के बचे हुए दो पेपर निरस्त कर दिए गए हैं। बीते दिनों मुख्यमंत्री शिवराज ने इसकी घोषणा की है और छात्रों को जनरल प्रमोशल देने का फैसला किया है।इसके लिए दोनों विषय में सभी विद्यार्थियों(students) को पास किया जाएगा। वहीं, लॉकडाउन से पहले ली गई परीक्षाओं की कॉपियों का मूल्यांकन कार्य तेजी से जारी है। इसमें 10वीं का 70 फीसदी हो चुका है, ऐसे में अधिकारियों ने संकेत दिए है कि जून के पहले सप्ताह में रिजल्ट जारी हो सकता है।करीब 28 साल बाद ऐसा माैका आया जब बाेर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शिक्षक अपने घर पर कर रहे हैं, इससे पहले भोपाल गैस कांड के दौरान ऐसे हालात बने थे।

नही मिलेगा बेस्ट ऑफ फाइव योजना का लाभ – वही इस साल विद्यार्थियों को बेस्ट ऑफ फाइव योजना का लाभ नहीं मिलेगा। हर साल प्रदेश के करीब 1 लाख विद्यार्थी को बेस्ट ऑफ फाइव के तहत पास किया जाता था, लेकिन इस बार इसका लाभ किसी को नही मिलेगा। दरअसल, मंडल ने 2016-17 की बोर्ड परीक्षा से इस योजना को लागू किया था। इसके तहत 10वीं में छह विषयों में से सिर्फ पांच में ही पास होना अनिवार्य है। यदि विद्यार्थी एक पेपर में फेल हो जाता है तो उसे पास माना जाएगा।लेकिन कोरोना संकट काल के चलते 21 मार्च को सभी परीक्षाएं स्थगित हो गई गईं थी, जिसमें करीब साढ़े 19 लाख विद्यार्थी शामिल होने थे और शासन ने बचे दो पेपरों में सभी को पास करने की घोषणा की है। ऐसे में विद्यार्थियों को बेस्ट ऑफ फाइव योजना का लाभ मिलना संभव नही।खास बात ये है कि अधिकतर विद्यार्थी गणित या विज्ञान विषय में फेल होते थे, जिन्हें बेस्ट ऑफ फाइव के तहत पास किया जाता था, लेकिन इस बार जनरल प्रमोशन मिलने के चलते इसका लाभ मिलना संभव नही।

अच्छी खबर: अब मध्यप्रदेश के किसी भी जिले में जाने के लिए नहीं लगेगा पास, कर सकेंगे नियमों का पालन करते हुए यात्रा

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश ने शासन ने अपने प्रदेश के नागरिकों को राहत भरी खबर दी है। अब प्रदेश के नागरिकों को जब भी जहां जाना हो वह जा सकता है, लेकिन फिजिकल डिस्टेंसिंग सहित अन्य कोविड-19 को लेकर जारी हुए निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। प्रदेश में यहां वहां अन्य जिलों में फंसे नागरिक अब अपने घर बिना पास के व अनुमति के जा सकते हैं। इस संबंध में नए दिशा निर्देश जारी हुए हैं।

लॉकडाउन के चौथे चरण में मध्य प्रदेश के ग्रीन जोन वाले इलाकों में कई तरह की छूट के बाद अब शिवराज सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है. गृह, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया है कि अब एक ग्रीन जोन से दूसरे ग्रीन जोन वाले इलाकों में जाने के लिए किसी तरह के पास की जरूरत नहीं रहेगी. यानी एमपी में अब ग्रीन-टू-ग्रीन जोन पास-फ्री रहेगा.

राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के मुताबिक अब ग्रीन-टू-ग्रीन जोन में अपने खुद के वाहन से यात्रा की जा सकेगी. यही नहीं, ग्रीन-टू-ग्रीन जोन जाने के दौरान बीच में यदि रेड जोन भी आता है तो भी हाईवे में पास की आवश्यकता नहीं रहेगी. गृहमंत्री के मुताबिक यदि रेड जोन से ग्रीन जोन में या ग्रीन जोन से रेड जोन में आवागमन करना है तो उसके लिये प्रशासन द्वारा जारी किये जाने वाले ई-पास की आवश्यकता फिलहाल रहेगी और यहां बगैर पास के आवागमन पहले की ही तरह प्रतिबंधित रहेगा.

एमपी के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि विधायकों की एक शिकायत रहती थी कि जनप्रतिनिधि होने के कारण उन्हें रेड जोन वाले इलाकों में जाना पड़ता है या कई बार बैठकों के लिए जिला मुख्यालयों में भी आना होता है. ऐसे में कई बार ई-पास बनवाने का समय नही होता है. जिससे नाकों पर समस्या आती है. इसको ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा फैसला किया गया है कि विधायकों के लिये विधानसभा द्वारा जारी आईडी कार्ड ही ई-पास माना जाएगा.

नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि विधानसभा सदस्य अगर अपने निवास स्थान से अपने कार्यस्थल/जिले/बैठकों में आना-जाना चाहते हैं, भले ही वह रेड जोन जिला हो, उनके लिये विधानसभा द्वारा जारी आईडी कार्ड ही ई-पास के रूप में मान्य होंगे. विधानसभा सदस्यों के लिए ई-पास की अलग से जरूरत नहीं होगी.

 

नवीन निर्देश – राज्‍य शासन के नवीनतम निर्देशानुसार प्रदेश के अंदर यात्रा की स्थिति में केवल भोपाल, इंदौर और उज्‍जैन से यात्रा प्रारंभ होने पर ही ई पास के आवेदन स्‍वीकार किए जाएंगे। शेष जिलों के लिए ई पास की आवश्‍यकता नहीं होगी । प्रदेश से अन्‍य राज्‍य में अथवा अन्‍य राज्‍य से प्रदेश के किसी जिले में यात्रा हेतु पूर्व व्‍यवस्‍था अनुसार ई पास प्राप्‍त करना अनिवार्य होगा।

महत्वपूर्ण सूचना:-मध्य प्रदेश शासन द्वारा दी जा रही ई पास सुविधा पूर्णतः नि:शुल्क है ।

 

डॉक्टर को दी गई नसीहत, न करें ऐसा काम, वरना शासन द्वारा की जाएगी सख्त कार्यवाही

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) मध्यप्रदेश/ जबलपुर।मान्यता प्राप्त विश्विद्यालय से बी ए एम एस और होम्योपैथिक , यूनानी विषय में उपाधि प्राप्त एवं भोपाल बोर्ड से पंजीकृत योग्यताधारी अनेक बी. ए. एम. एस. और बी. एच. एम. एस., बी. यू. एम. एस. चिकित्सकों द्वारा अपनी चिकित्सा पद्धति में दवाएं लिखने के स्थान पर उसकी आड़ में एलोपथी में दवाएं लिखने और उन दवाओं से मरीजों को नुकसान होने सम्बन्धी शिकायतें मिल रही हैं। ऐसा करना गैरकानूनी है। आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सकों के द्वारा ऐसा करने से उनका पंजीयन निरस्त हो सकता है।
मुख्य चिकितसा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष मिश्रा ने कहा है कि कोरोना महामारी के संक्रमण काल में अनेक आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक, यूनानी चिकित्सकों के द्वारा सर्दी जुखाम बुखार आदि का एलोपैथिक पद्धति से इलाज किये जाने सम्बन्धी शिकायतें प्राप्त हुई हैं । इससे कोरोना मरीज की शीघ्र जाँच में देरी होती है। इसके अलावा कई बी ए एम एस और बी. एच. एम. एस., बी. यू. एम. एस. चिकित्सक अपने क्लीनिक का पंजीयन भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में कराये बिना ही चिकित्सा व्यवसाय कर रहे हैं, जो की गैरकानूनी है। वे शीघ्र ही अपने दवाखाने का पंजीयन सम्बन्धी कार्रवाई पूर्ण कर लें। आधुनिक चिकित्सा पद्धति के अतिरिक्त वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति में शासन से मान्यता प्राप्त संस्था से आयुर्वेद, होमियोपैथ, यूनानी आदि मान्य चिकित्सा पद्धति में उपाधिधारी आयुष डाक्टर वास्तविक या मान्य डाक्टर की श्रेणी के अन्तर्गत आते हैं । फर्जी या झोलाछाप की नहीं। किन्तु इन्हें क्लीनिक खोलकर चिकित्सा व्यवसाय करने के पूर्व संबंधित चिकित्सा परिषद और सीएमएचओ कार्यालय में पंजीयन कराना अनिवार्य होता है। मप्र राजपत्र 19 जून 2003 के अनुसार ऐसे व्यक्ति जिन्होंने आयुर्वेद के साथ मार्डन मेडीसन एन्ड सर्जरी अर्थात इंटीग्रेटेड बी.ए.एम.एस. उपाधि प्राप्त की है, सिर्फ वे ही आधुनिक चिकित्सा पद्धति एलोपैथी में उतने स्तर पर चिकित्सा कार्य कर सकते हैं, जितना की उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इनको छोड़ कर शेष बी. ए. एम. एस. चिकित्सक एलोपैथी में चिकित्सा व्यवसाय नहीं कर सकते हैं।

जेल प्रशासन ने की वादाखिलाफी, बेरोजगारी की मार झेल रहे युवा, घर-परिवार चलाना हो रहा मुश्किल, आ गई सड़क पर आने की नोवत

इंडिया 2डे न्यूज(आपके-साथ) मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के दर्जनों युवा इन दिनों बेरोजगारी की मार झेल रहें हैं, जिनके घर पर खाने के लाले पड़ गए हैं, वह रोजी और रोटी दोनों के लिए मुहताज हो गए हैं, जिससे वह अब इन दिनों अपनी जिंदगी को एक तरफ कुआं तो वहीं दूसरी तरफ खाई की तरह समझ रहें हैं, अब ऐसे में ऐसे युवा सरकार से शीघ्र ही मदद की अपील कर रहें हैं, ताकि उनकी सुनवाई हो सके और वह वापस अपनी नोकरी कर सकें। दरअसल यह सभी दर्जनों की संख्या में बेरोजगारी की मार झेल रहे युवा मध्यप्रदेश जेल के तुगलकी फरमान की वजह से बेरोजगार हैं, जिनसे जुड़े घर व उनके परिवार भी मानों सड़क पर आ गए हैं, जिनको नोकरी पर रखे जाने का वादा करके जेल प्रशासन ने वादा खिलाफी कर दी है। इस संबंध का आरोप पीड़ितों ने लगाया है और शीघ्र ही उन्हें नोकरी पर वापस रखने की मांग करते हुए लॉक डाउन के उपरांत उग्र आंदोलन करने सहित अन्य आक्रामक कदम उठाए जाने की भी चेतावनी जेल प्रशासन को दी है।

इस संबंध में पीड़ितों ने बताया कि उच्च न्यायालय जबलपुर के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश की सभी सर्किल जेल, जिला जेल, सब जेल पर विचारधीन बंदियों की समस्त पेशियाँ वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से कराई जानी है। जेल मुख्यालय के पत्र क्र. 17062/आधुनिकीरण201/19 भोपाल दिनाक 28/12/2018 के माध्यम से सभी जेलों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए तकनीकी सुपरवाइजर(आऊट सोर्सिंग) के माध्यम से उपलबंध कराने के निर्देश दिए गये है। जेल मुख्यालय के पत्र क्र. 3043/आधुनिकीरण/19 भोपाल के द्वारा तकनिकी सुपरवाइजर नियुक्त किया गया है।
जेल विभाग के द्वारा दिनाक 28/01/2020 बिना सूचित किये 29/01/2020 को 126 पूरे म.प्र जेल के तकनीकी सुपरवाइजर(आउट सोर्सिंग) को जेल अधीक्षक के द्वारा भार मुक्त कर दिया, जिससे पूरे राज्य की जेलों के 126 तकनिकी सुपरवाइजर एकत्रित होकर जेल प्रशासन के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं।

 

जिसके चलते यह सभी जेल मुख्यालय के समक्ष अपनी बात रखने गये, तब मुख्यालय के अधिकारियो के द्वारा कहा गया कि वेंडर परिवर्तित होते ही तमाम लोगो को पुनः कार्य पर रखा जाएगा और पुनः उनका बकाया दो माह का वेतन भी जल्द से जल्द दिया जाएगा, जिसके लिए कभी हफ्ते भर, कभी 10दिन, कभी 15दिन का समय बोला गया, लेकिन अभी दो महीने बाद न ही उनको वेतन मिला और न ही उन्हें पुनः कार्य पर रखा गया। वहीं उन्होंने बताया कि वह सभी विभाग द्वारा दिए गए आश्वासन पर ही इतने समय से घर पर बैठे हैं जिससे वह सभी पूरी तरह से बेरोजगार तो हो ही गए हैं, साथ ही लॉक डाउन के कारण आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। जिससे समस्त तकनीकी सुपरवाइजर बहुत परेशान हैं और दाने-दाने को मोहताज हैं।

डीएलएड परीक्षा के लिये ऑनलाइन आवेदन 10 जून तक

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) मध्यप्रदेश/ जबलपुर। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा सत्र 2019-20 की प्रारंभिक शिक्षा में पत्रोपाधि पाठ्यक्रम (डीएलएड) नियमित प्रथम एवं द्वितीय वर्ष की परीक्षा के लिये आवेदन-पत्र एम.पी.ऑनलाइन के कियोस्क अथवा पोर्टल के माध्यम से 25 मई से 10 जून तक भरे जा सकेंगे।

बाहरी राज्यों/शहरों में फंसे जबलपुर के नागरिकों को वापिस लाने और आर्थिक सहायता प्रदान करने प्रदेश सरकार करेगी विशेष प्रयास, इस टोल फ्री नंबर पर करें कोल

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) मध्यप्रदेश। बाहरी राज्यों अथवा शहरों में फंसे जबलपुर के निवासियों को वापिस लाने प्रदेश शासन द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त श्री पी नरहरि ने पत्र भेजकर ऐसे व्यक्तियों/परिवारों की जानकारी संकलित करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश शासन के निर्देशों के परिपालन में निगमायुक्त आशीष कुमार ने सभी सम्भागीय अधिकारियों को अन्य राज्यों अथवा शहरों में फंसे व्यक्तियों/परिवारों की जानकारी एकत्र कर निर्धारित प्रपत्र में जमा करने के निर्देश दिए हैं। दूसरे राज्यों या शहरों में फंसे ऐसे व्यक्तियों एवं परिवारों के लिए नगर निगम प्रशासन ने टेलीफोन नम्बर
07614144444 जारी किया है जिस पर संपर्क कर वे अपनी जानकारी दर्ज़ करा सकते हैं। प्राप्त सूचना के आधार पर प्रदेश सरकार द्वारा ऐसे व्यक्तियों/परिवारों को वापिस लाने की उचित व्यवस्था के साथ साथ शासन की अन्य योजनाओं का लाभ भी प्रदान की जाएगी।इसके लिए कॉल सेंटर के नंबर पर आधार नंबर समग्र आईं ड़ी नम्बर और मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज कराना होगा।

सहकारिता विभाग में नहीं हो रही कनिष्ठ विक्रेताओं की नियुक्ति, जनता व किसान हो रहे परेशान, शासन से की शीघ्र ही नियुक्ति करने की मांग

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) मध्यप्रदेश। सहकारिता विभाग ने 2018 में 3629 पदों पर कनिष्ठ संविदा विक्रेताओं की भर्ती निकली थी, जिसका परिणाम 2 वर्ष बाद 20 मार्च 2020 में आ गया, इसके पश्चात सभी चयनित अभ्यर्थियों का (दस्तावेज सत्यापन) डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होना था और फिर इनकी नियुक्ति सरकारी राशन दुकानों,कृषि साख,फसल उपार्जन केंद्रों में होना था, लेकिन अभी तक नियुक्ति के संबंध में शासन के द्वारा कोई भी कदम नहीं उठाया गया।

बताया गया है कि सतना जिले में कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति की प्रकिया और दस्तावेजों का सत्यापन भी शुरू हो चुका था, लेकिन लॉकडाउन के कारण सहकारिता विभाग ने एक आदेश क्र. साख/2020/369 दिनांक 2 मई 2020 को जारी किया गया, जिसमें दस्तावेज सत्यापन प्रकिया को रोकने को कहा गया। जिसको लेकर सभी चयनित अभ्यर्थियों में आक्रोश व्याप्त है।


सभी चयनित उम्मीदवारों का कहना(मांग) है कि सोशल डिस्टेन्स का पालन करते हुए ये नियुक्ति प्रक्रिया पुनः जल्द से जल्द शुरू की जाए, ताकि वह इस कोरोना संकटकाल के द्वारा अपनी सेवाएं शुरू कर दें। सभी अभ्यर्थियों ने यह मांग फेसबुक, ट्विटर और मेल के माध्यम से शासन से मांग की है, क्योंकि इस समय राशन वितरको को वितरण में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, भीड़ अधिक है और वितरकों की संख्या कम है। सभी अभियर्थियों ने शीघ्र ही नियुक्ति करने की मांग की है।

रोजगार पोर्टल से युवाओं को मिलेंगे रोजगार के बेहतर अवसर, पोर्टल के नाम के लिये सुझाव आमंत्रित

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) मध्यप्रदेश। प्रदेश के युवाओं को रोजगार प्राप्त करने के लिये ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा के साथ-साथ रोजगार प्राप्त करने के हर संभव अवसर प्रदान करने के लिये रोजगार पोर्टल प्रारंभ किया जा रहा है। रोजगार आयुक्त ने बताया कि रोजगार पोर्टल के लिये 15 रोजगार एक्सचेंज का प्रबंधन करने के लिये एक निजी संस्था के साथ समझौता किया गया है। प्रदेश में शुरू किये जा रहे रोजगार पोर्टल के उपयुक्त नाम के लिये लोक सेवा प्रबंधन विभाग के अन्तर्गत राज्य लोक सेवा अभिकरण द्वारा नागरिकों से सुझाव मांगे गए हैं। नागरिकगण 26 मई तक अपने सुझाव www.mp.mygov.in पोर्टल पर ऑनलाइन दे सकते हैं।