मास्क की तरह चश्मा लगाने की भी डालिए आदत, वरना आप भी हो सकते हैं संक्रमित, आंखों से भी फेल रहा कोरोना, पढ़िए पूरी खबर

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) देश-दुनिया। डॉक्टर बताते हैं कि जब कोई COVID-19 संक्रमित मरीज किसी स्वस्थ व्यक्ति के पास 1 मीटर ससे कम दूरी पर खड़ा होता है, तो वायरस हवा के रास्ते मुंह, नाक और आंख के पास पहुंच जाता है. इस स्थिति में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए आंखों को भी संक्रमण से बचाना उतना ही जरूरी है, जितना मुंह, नाक और शरीर की त्वचा को, कोरोना वायरस से बचाव करने के लिए अगर आप महज मास्क से अपना मुंह और नाक ढकते हैं, तो ये खबर आपके लिए ही है. डॉक्टर्स का कहना है कि सिर्फ मुंह पर मास्क लगाना पर्याप्त नहीं है. अगर कोरोना संक्रमित व्यक्ति के 1 मीटर से कम दूरी पर आप खड़े हैं, तो आंखों से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों ने बताया है कि मुंह और नाक के आलावा आंखों को भी सुरक्षित रखना बेहद जरुरी है. ऐसे में हर इंसान को चश्मा पहनना चाहिए, ताकि आंखें संक्रमण से बच सकें. डॉक्टर बताते हैं कि जब कोई COVID-19 संक्रमित मरीज किसी स्वस्थ व्यक्ति के पास 1 मीटर ससे कम दूरी पर खड़ा होता है, तो वायरस हवा के रास्ते मुंह, नाक और आंख के पास पहुंच जाता है. इस स्थिति में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए आंखों को भी संक्रमण से बचाना उतना ही जरूरी है, जितना मुंह, नाक और शरीर की त्वचा को. डॉक्टर सलाह देते हैं कि सार्वजनिक जगहों पर जाते समय हर किसी को चश्मा लगाना बेहद जरूरी है. चाहे वो नज़र का चश्मा हो, या फिर धूप से बचने का चश्मा।

कोरोना वायरस दे सकता है सबस्यूट थायरॉयडिटिस
कोरोना वायरस को लेकर लगातार रिसर्च चल रहे हैं. इसी बीच द जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित एक नए मामले के अध्ययन के अनुसार कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित हुए रोगियों को एक सूजन संबंधी बीमारी ‘सबस्यूट थायरॉयडिटिस’ (Thyroid) हो सकती है. ये बात नए शोध में सामने आई है. शोधकर्ताओं ने बताया कि सबस्यूट थायरॉयडिटिस एक सूजन थायरॉयड रोग है. इसकी विशेषता है कि इसके चलते गर्दन में दर्द होता है और यह आमतौर पर एक अपर रेस्पिरेट्री ट्रैक्ट संक्रमण के चलते होता है. कोरोना संक्रमण के लक्षणों या फिर पोस्ट इफेक्ट इस बीमारी के तौर पर हो सकता है।

हल्दी हराएगी कोरोना को
मेडिकल साइंस में हल्दी को भी कोरोना से लड़ने में कारगर माना जा रहा है. मार्च महीने में कोरोना वायरस ने जब यूरोपीय और पश्चिम एशिया के देशों में कहर बरपाना शुरू हुआ तो अचानक हिन्दुस्तान के पारंपरिक खान-पान में सदियों से शामिल हल्दी की मांग अचानक उन देशों में अचानक बढ़ गई. माना जा रहा है कि हल्दी के सेवन से कोरोना बीमारी से बचा जा सकता है और अगर इंफेक्शन हो भी गया है, तो इलाज में हल्दी से काफी हद तक मदद मिल सकती है।

देश में गर्मी का सितम, चल रही है लू और आग की तरह हवा

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) देश-दुनिया। नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर समेत देश के ज्यादातर हिस्सों में मई के अंत में गर्मी ने सितम ढहाना शुरू कर दिया है. दिनभर झुलसाने वाली तेज धूप के साथ दोपहर में गर्म हवा यानी लू चल रही है. मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आने वाले 4-5 दिनों तक ऐसा ही मौसम बना रहेगा और फिलहाल गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। देश की राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आज यानी रविवार को ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि शनिवार को येलो अलर्ट था. मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिनों में और ज्यादा गर्म हवाएं चलने का अनुमान है. बता दें कि राजधानी दिल्ली में शनिवार को सीजन का सबसे गर्म दिन रहा. दिल्ली में पारा 46 डिग्री पहुंचने के साथ रिकॉर्ड टूट गया. मौसम विभाग की ओर से कहा गया कि पश्चिमोत्तर भारत में लू चलने के कारण शहर में अगले 3-4 दिन में भीषण गर्मी पड़ने का अनुमान है। दिल्ली के अलावा राजस्थान और यूपी के भी कई शहरों में तापमान 44 डिग्री के पार पहुंच गया है. वहीं, हरियाणा, मध्य प्रदेश, विदर्भ, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और गुजरात में भी कई शहरों पर लू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक अगले 24 घंटे में दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु के भी कुछ हिस्सों में प्रचंड गर्मी की आशंका है. जबकि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, विदर्भ, मराठवाड़ा उत्तरी मध्य महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में लू जारी रहेगी। मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों में शनिवार को अधिकतम तापमान 44 और 46 डिग्री के बीच ही रहा. सफदरजंग वेधशाला ने अधिकतम तापमान 44.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया, जो सामान्य से पांच डिग्री अधिक है. पालम, लोधी रोड और आयानगर में मौसम केंद्रों ने अधिकतम तापमान 45.6 डिग्री सेल्सियस, 44.4 डिग्री सेल्सियस और 46.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। दिल्ली-एनसीआर में 24 से 27 मई के बीच भी तपती गर्मी जारी रहेगी. आईएमडी के क्षेत्रीय पूर्वानुमान केंद्र के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि ताजा पश्चिमी विक्षोभ और निचले स्तर पर पूर्वी हवाओं के चलने से 28 मई को तेज गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि 29 और 30 मई को दिल्ली-एनसीआर में तेज आंधी के साथ बारिश होने का अनुमान है। वहीं, राजस्थान में भी मौसम विभाग का कहना है कि अगले 8 दिनों में गर्मी का प्रकोप तेज होगा. यूं तो राजस्थान में अप्रैल में ही भीषण गर्मी पड़ने लगती है, मगर इस बार मई में भी गर्मी देरी से शुरू हुई है. राजस्थान के ज्यादातर शहरों में तापमान 40 डिग्री या उसके ऊपर बना हुआ है. पश्चिमी राजस्थान में 44 डिग्री के ऊपर तापमान चल रहा है

चेहरे पर चमक लाता है शशकासन, जानें इसके लाभ

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) देश-दुनिया।  लॉकडाउन में घर में कैद होने के साथ देश-दुनिया में चल रही कई अप्रिय घटनाओं की वजह से लोगों को मानसिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग तो ऐसे हैं, जो अपने परिवार के साथ रहते हुए भी हमेशा मानसिक अंशाति का अनुभव करते हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि अपना ध्यान किसी रचनात्मक कार्य में लगाने के साथ अपने करीबियों के साथ फोन जुड़े रहें। इसके अलावा एक ऐसा आसन है, जो आपकी ऐसी ही कई समस्याओं को सुलझा सकता है। आइए, जानते हैं शशकासन से जुड़ी हुई खास बातें-

क्या है शशकासन
शशकासन को शशांक आसन भी कहते हैं। इस योग मुद्रा के दौरान शरीर खरगोश के समान आकृति में आ जाता है इसलिए इसे शशकासन कहते हैं। संस्कृत भाषा में खरगोश को शशक: कहा जाता है, इसी आधार पर इस आसन का नाम शशकासन पड़ा।

मानसिक शांति और चेहरे पर प्राकृतिक चमके लिए जरूर करें 
यह आसन पेट, कमर व कूल्हों की चर्बी कम करके आंत, यकृत, अग्न्याशय व गुर्दों को बल प्रदान करता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से तनाव, क्रोध,  चिड़चिड़ापन आदि मानसिक रोग भी दूर हो जाते हैं। साथ ही अगर आपका मन स्थिर नहीं रहता या आपको मानसिक परेशानी रहती है, तो यह मन को शांत करने के लिए सबसे बेहतर आसन है। वहीं, आपके चेहरे पर अगर दाग-धब्बे और चमक नहीं है, तो इस आसन से चेहरे पर नेचुरल ग्लो भी आता है।

ऐसे करें शुरुआत
-शशकासन करने के लिए पहले आप पालथी लगाकर बैठ जाए। जिसे चौकड़ी लगाना भी कहते हैं और योग की दुनिया में इसे पद्मासन कहते हैं।
-अब अपने घुटनों को थोड़ा-सा लूज छोड़ें और दोनों हाथों को फैलाते हुए ऊपर की तरफ ले जाएं।
-इस दौरान आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए। ऊपर की तरफ हाथ ले जाते हुए सांस अंदर भरें।
-अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों को आगे की तरफ लाएं। इस दौरान आपकी चिन यानी ठोड़ी फर्श पर टिकाने का प्रयास करें।
-ध्यान रखें कि जरूरी नहीं हर आसन आप पहली ही बार में पर्फेक्ट पोश्चर में कर पाएं। जैसे-जैसे मसल्स रिलैक्स और लूज होती रहेंगी आपके पोज बेहतर होते रहेंगे। -आप इस आसन को एक वक्त में 4 से 5 बार कर सकते हैं।

रहिए सावधान, करिए सबको सावधान: नहीं तो सैनिटाइजर की बोतल में हो सकता है विस्फोट से बड़ा हादसा

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) देश-दुनिया। एक रिपोर्ट के अनुसार इस समय जब दुनिया कोरोना वायरस महामारी से लड़ रही है। लोग वायरस को दूर रखने के लिए हर तरीके के एहतियात बरत रहे हैं। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हैंड सैनिटाइजर एक महत्वपूर्ण औजार है। लोग कार में भी सैनिटाइजर रख रहे हैं। देश और दुनिया के कई हिस्सों में गर्मी बढ़ती जा रही है। तापमान में इजाफा हो रहा है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी है कि धूप में खड़ी कार में सैनिटाइजर के बोतल में विस्फोट हो सकता है?

हाल ही में अमेरिका के विनकंसिन में फायर डिपार्टमेंट ने एक अडवाइजरी जारी करते हुए लोगों को सचेत किया। अथॉरिटी ने एक क्षतिग्रस्त कार की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि कार के अंदर रखे सैनिटाइजर बोतल में विस्फोट होने से यह नुकसान हुआ है। पोस्ट में लिखा गया था कि अधिकतर सैनिटाइजर्स एलकोहल बेस्ड होते हैं इसलिए ये ज्वलनशील होते हैं और गर्म मौसम धूम में खड़ी कार में यदि सैनिटाइजर को छोड़ दिया जाए तो विस्फोट की संभावना रहती है। हालांकि, बाद में इस पोस्ट को हटा लिया गया और स्पष्टीकरण दिया गया। लेकिन इससे वाहन मालिक यह जरूर सोचते रह गए कि सच क्या है।

आमतौर पर भारत में बिकने वाले सैनिटाइजर्स में एलकोहल की मात्रा 40 पर्सेंट कम होती है। कुछ ब्रैंड्स में एलकोहल की मात्रा 70 फीसदी से अधिक होती है। ऐसी वस्तु में आग या अधिक गर्मी की वजह से विस्फोट हो सकता है और यह काफी नुकसान पहुंचा सकता है। यहां तक की पूरी कार भी जल सकती है। पहले भी कई बार कार में बॉडी स्प्रे और कार क्लीनिंग केमिकल में विस्फोट के मामले आ चुके हैं।

70 फीसदी एलकोहल वाला सैनिटाइजर काफी ज्वलनशील होता है और इसका रखरखाव बेहद सावधानी पूर्वक करने की जरूरत है। यदि इसे धूप या गर्मी में अधिक समय तक रखा जाए तो इसमें वास्प बनने लगता है और कंटेनर के भीतर दबाव बढ़ने लगता है। इससे विस्फोट और नुकसान हो सकता है। हालांकि, आग पकड़ने के लिए चिंगारी की आवश्यकता है।

यूएस फायर एजेंसी द्वारा दिखाए गए वाहन में सैनिटाइजर्स से आग कैसे लग गई यह कहना मुश्किल है, लेकिन सबक सीखना महत्वपूर्ण है कि इस तरह के ज्वलनशील वस्तु को कार में छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि, इस महामारी से बचने के लिए सैनिटाइजर्स को साथ रखना जरूरी है, लेकिन इसे सावधानी के साथ रखें तो यह वायरस से बचाएगा और कोई नुकसान भी नहीं होगा।

डॉक्टर को दी गई नसीहत, न करें ऐसा काम, वरना शासन द्वारा की जाएगी सख्त कार्यवाही

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) मध्यप्रदेश/ जबलपुर।मान्यता प्राप्त विश्विद्यालय से बी ए एम एस और होम्योपैथिक , यूनानी विषय में उपाधि प्राप्त एवं भोपाल बोर्ड से पंजीकृत योग्यताधारी अनेक बी. ए. एम. एस. और बी. एच. एम. एस., बी. यू. एम. एस. चिकित्सकों द्वारा अपनी चिकित्सा पद्धति में दवाएं लिखने के स्थान पर उसकी आड़ में एलोपथी में दवाएं लिखने और उन दवाओं से मरीजों को नुकसान होने सम्बन्धी शिकायतें मिल रही हैं। ऐसा करना गैरकानूनी है। आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सकों के द्वारा ऐसा करने से उनका पंजीयन निरस्त हो सकता है।
मुख्य चिकितसा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष मिश्रा ने कहा है कि कोरोना महामारी के संक्रमण काल में अनेक आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक, यूनानी चिकित्सकों के द्वारा सर्दी जुखाम बुखार आदि का एलोपैथिक पद्धति से इलाज किये जाने सम्बन्धी शिकायतें प्राप्त हुई हैं । इससे कोरोना मरीज की शीघ्र जाँच में देरी होती है। इसके अलावा कई बी ए एम एस और बी. एच. एम. एस., बी. यू. एम. एस. चिकित्सक अपने क्लीनिक का पंजीयन भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में कराये बिना ही चिकित्सा व्यवसाय कर रहे हैं, जो की गैरकानूनी है। वे शीघ्र ही अपने दवाखाने का पंजीयन सम्बन्धी कार्रवाई पूर्ण कर लें। आधुनिक चिकित्सा पद्धति के अतिरिक्त वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति में शासन से मान्यता प्राप्त संस्था से आयुर्वेद, होमियोपैथ, यूनानी आदि मान्य चिकित्सा पद्धति में उपाधिधारी आयुष डाक्टर वास्तविक या मान्य डाक्टर की श्रेणी के अन्तर्गत आते हैं । फर्जी या झोलाछाप की नहीं। किन्तु इन्हें क्लीनिक खोलकर चिकित्सा व्यवसाय करने के पूर्व संबंधित चिकित्सा परिषद और सीएमएचओ कार्यालय में पंजीयन कराना अनिवार्य होता है। मप्र राजपत्र 19 जून 2003 के अनुसार ऐसे व्यक्ति जिन्होंने आयुर्वेद के साथ मार्डन मेडीसन एन्ड सर्जरी अर्थात इंटीग्रेटेड बी.ए.एम.एस. उपाधि प्राप्त की है, सिर्फ वे ही आधुनिक चिकित्सा पद्धति एलोपैथी में उतने स्तर पर चिकित्सा कार्य कर सकते हैं, जितना की उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इनको छोड़ कर शेष बी. ए. एम. एस. चिकित्सक एलोपैथी में चिकित्सा व्यवसाय नहीं कर सकते हैं।

कोरोना को मात देने यह दवा के इस्तेमाल के लिए जारी हुई एडवाइजरी, पढ़िए पूरी खबर

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) स्वास्थ्य। मेडिकल जर्नल द लैंसेट का भले ही कहना हो कि कोविड-19 मरीजों के इलाज में मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल आने वाली दवा हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन से फायदा मिलने का कोई सबूत नहीं मिला है, मगर भारत सरकार को अब भी इस दवा पर भरोसा है। भारत में स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना से बचाव के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्ववीन के इस्तेमाल की अनुमति है, मगर अब सरकार ने इसके इस्तेमाल का दायरा बढ़ा दिया है। सरकार र द्वारा शुक्रवार को जारी एडवाइजरी में अब एसिम्प्टमेटिक हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर को भी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्ववीन लेने को कहा गया है। सरकार ने एम्स की तरफ से कोविड-19 के लिए गठित नेशनल टास्क फोर्स द्वारा एचसीक्यू के सुरक्षित इस्तेमाल के नतीजों की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया।

सरकार द्वारा संशोधित एडवाइजरी में गैर-कोविड-19 अस्पतालों में काम करने वाले एसिम्प्टमेटिक हेल्थकेयर, कंटेनमेंट जोन में निगरानी क्षेत्र में तैनात फ्रंटलाइन वर्कर्स और कोरोना वायरस संक्रमण से जुड़ी गतिविधियों में शामिल पुलिस और अर्धसैनिक बलों को हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा लेन की सलाह दी गई है।

आईसीएमआर द्वारा यह संशोधित एडवाइजरी जारी की गई है। हालांकि इसमें आगाह किया गया है कि दवा के सेवन से झूठी सुरक्षा की भावना पैदा नहीं होनी चाहिए। इस एडवाइजरी के मुताबिक, कोरोना प्रभावित और गैर कोरोना प्रभावित इलाकों में काम करने वाले सभी स्वास्थ्यकर्मियों को इस दवा का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की अध्यक्षता में संयुक्त निगरानी समूह और एम्स, आईसीएमआर, नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के अस्पतालों से जुड़े विशेषज्ञों की कोरोना प्रभावित और गैर कोरोना प्रभावित इलाकों में काम करने वाले सभी स्वास्थ्यकर्मियों को इस दवा का उपयोग करने को लेकर समीक्षा बैठक में सिफारिश के बाद यह एडवाइजरी जारी की गई।

गौरतलब है कि इससे पहले द लैंसेट ने कहा कि कोविड-19 मरीजों के इलाज में हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन से फायदा मिलने का कोई सबूत नहीं मिला है। रिसर्च का हवाला देकर दावा किया गया है कि मर्कोलाइड के बिना या उसके साथ इस दवा के लेने से कोविड-19 मरीजों की मृत्युदर बढ़ जाती है।

अगर आपको ऐसे लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत करवाएं कोरोना की जांच, लक्षण देते हैं कोरोना के संकेत

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) स्वास्थ्य। कोविड-19 वायरस, अलग-अलग लोगों को अलग-अलग तरह से प्रभावित करता है. संक्रमित हुए ज़्यादातर लोगों को थोड़े से लेकर मध्यम लक्षण तक की बीमारी होती है और वे अस्पताल में भर्ती हुए बिना ठीक हो जाते हैं।

ज़्यादा सामान्य लक्षण:- बुखार,सूखी खांसी, थकान।

कम सामान्य लक्षण:- खुजली और दर्द, गले में खराश, दस्त, आँख आना, सिरदर्द, स्वाद या गंध का अनुभव नहीं होना, त्वचा पर खरोंच या उंगलियों या पैर की उंगलियों का, रंग बिगड़ना।

गंभीर लक्षण:- सांस लेने में कठिनाई या सांस की तकलीफ़, सीने में दर्द या दबाव, बोल या चल न सकना।

यदि आप में गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं. अपने डॉक्टर के पास या अस्पताल में जाने से पहले हमेशा फ़ोन करके जाएं. जो लोग स्वस्थ्य हैं और उन्हें वायरस के थोड़े-बहुत लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो उन्हें घर पर ही अपने आप को पूरी तरह स्वस्थ रखने की कोशिश करनी चाहिए. वायरस से संक्रमित होने के बाद, इसके लक्षण दिखाई देने में आम तौर पर 5-6 दिन लगते हैं. हालांकि, कुछ मामलों में लक्षण दिखने में 14 दिन भी लग सकते हैं।

वजाइना में होती है यीस्ट इंफेक्शन तो इन बातों का रखें ध्यान

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) देश-दुनिया।  महिलाओं के शरीर को कई तरह की बीमारियों व इंफेक्शन का खतरा रहता है। ज्यादातर महिलाएं छोटी मोटी इंफेक्शन होने पर डॉक्टर या परिवार में किसी को न बात कर खुद ही उनका इलाज कर लेती है या उन्हें अनदेखा कर देती है। कई बार इस तरह अनदेखा की जाने वाली इंफेक्शन ज्यादा बढ़ जाती है। इन्हीं मे सबसे महिलाओं के वजाइना में यीस्ट इंफेक्शन की समस्या पाई जाती है। पब्लिक टॉयलट का ज्यादा इस्तेमाल करने, सही लाइफस्टाइल का न होने के कारण इस समस्या का सामना करना पड़ता है। महिलाएं इसके बारे में शर्म व किसी न किसी कारण किसे से शेयर नही करती है लेकिन इस इंफेक्शन को अनदेखा न कर सही समय पर डॉक्टर के साथ इस बारे में बात करनी चाहिए। चलिए आज आपको बताते है क्यों व किस तरह वजाइना में इंफेक्शन फैलती है।

इन्फेक्शन का कारण
कैंडिडा अल्बिकंस जो कि फंगस की तरह होता है। वजाइना का एसिडिक पीएच इस फंगस को बढ़ने से रोकता है लेकिन कई बार जब मौसम के किसी कारण पीएच का लेवल कम हो जाता है तो यह फंगस आसानी से बढ़ जाती है। वजाइना में बढ़ती हुई नमी व जलन भी यीस्ट को बढ़ाती है। जिस कारण वजाइना में खुजली होती है।

लक्षण
योनी के चारों ओर रेडनेस यानी  लालिमा, खुजली और जलन
असामान्य डिस्चार्ज यानी निर्वहन; बेईमानी, मोटी, सफेद
संभोग के दौरान दर्द
यूरिन करने में दर्द

क्या करें ?

  • डॉक्टर को जरूर कंसल्ट करें।
  • बाहरी वजाइना में खुजली से राहत के लिए क्रीम या नारियल तेल का उपयोग करें।
  • एक बार ओरल पिल जैसे की एंटी-फंगल और एंटी-माइक्रोबियल ले।

बरतें सावधानी

  • नायलॉन की तरह चुस्त कपड़े और सिंथेटिक सामग्री से बचें। केवल सूती अंडरवियर पहनें।
  • बाथरूम का उपयोग करने के बाद आगे से पीछे की ओर पोंछें।
  • तुरंत गीले स्विम सूट को  बदलें।
  • पानी या किसी भी लिक्विड को वजाइना में न जाने दे।
  • वजाइना के आसपास के हिस्सों को रोजाना साफ करें।
  • सुगंधित उत्पाद जैसे साबुन, स्नान उत्पाद सैनिटरी उत्पाद को भी साफ़ रखे।

कई बीमारियों से आपको दूर रखेगा खीरा , जानिए इसके जबरदस्त फायदे

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) देश-दुनिया।  गर्मियों में लोग खीरा खाना खूब पसंद करते हैं, जो सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद है। खीरा ना सिर्फ शरीर में पानी की कमी को पूरा करते है बल्कि इससे बॉडी को अंदर से ठंडक भी मिलती है। 1 कप कटे हुए खीरे (119 g) में 14 कैलोरी और 0.2 ग्राम फैट होता है। इसके अलावा इसमें 115.11g पानी, 2.4mg सोडियम, 2.6g कार्बोहाइड्रेट, 0.8g डाइटरी फाइबर, 1.6g शुगर, 0.7g प्रोटीन, 2% विटामिन ए, 6% विटामिन सी, 2% कैल्शियम और 1% आयरन होता है।

खीरा खाने के लाजवाब फायदे

बॉडी को करें हाइड्रेट
खीरे में 95% पानी होता है, जो शरीर में पानी की कमी नहीं होती और बॉडी हाइड्रेट रहती है। साथ ही विटामिन युक्त खीरा खाने से दिनभर शरीर को एनर्जी मिलती है।

वजन करे कंट्रोल
इसमें कैलोरी ना के बराबर होती है और यह मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में भी मदद करता है, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल लेवल रखें कंट्रोल
इससे कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल होता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है।

बेहतर पाचन क्रिया
इसमें फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है। वहीं इससे पाचन क्रिया भी सही रहती है, जिससे पेट की परेशानियां नहीं होती।

किडनी स्टोन से राहत
खाने में हर रोज इसका इस्तेमाल करने से पथरी की परेशानी से बचा जा सकता है। यह पित्ते और कीडनी की पथरी से बचाए रखती है। खीरे के रस को दिन में 2-3 बार पीना लाभकारी होता है।

कैंसर से बचाव
रोजाना खीरा खाने से कैंसर का खतरा कम होता है। इसमें मौजूद तत्व सभी तरह के कैंसर की रोकथाम में कारगर हैं।

ब्लड प्रैशर
हाई ब्लड प्रैशर से राहत पाने के लिए खीरे का सेवन बहुत अच्छा होता है। इसमें पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और यह शरीर को ठंड़ा रखता है।

पीरियड्स का दर्द दूर
दही में खीरे को कद्दूकस करके उसमें पुदीना, काला नमक, काली मिर्च, जीरा और हींग डालकर खाएं। इससे पीरियड्स प्रॉब्लम्स से आराम मिलेगा।

आंखों की थकान करे दूर
ज्यादा समय तक कंम्प्यूटर व फोन चलाने से आंखों में दर्द व तनाव होने लगता है। ऐसे में खीरे की स्लाइस को काटकर आंखों पर रखें। इससे आंखों की सारी थकान दूर हो जाएगी।

ग्लोइंग स्किन
खीरे और नींबू का रस को रस को मिलाकर 15 मिनट चेहरे पर लगाएं और फिर ठंडे पानी से धो लें। इससे ना सिर्फ स्किन ग्लोइंग होगी बल्कि इसमें मौजूद ब्‍लीचिंग गुण टैनिंग व सनबर्न की समस्या को दूर करने में भी मदद करेंगे।

बहुत असरकारी है तुलसी की चाय; तुलसी में कई स्वास्थ्य गुण मौजूद

इंडिया 2डे न्यूज (आपके-साथ) देश-विदेश।  तुलसी का इस्तेमाल लोग सदियों से औषधी रूप में करते आ रहे है। तुलसी में कई स्वास्थ्य गुण मौजूद होते है जो सभी हेल्थ प्रॉबल्म का झट से खात्मा कर देते है
तुलसी चाय कैसे बनाएं ?
सबसे पहले तो हम आपको यह बताते हैं कि तुलसी की चाय बनानी कैसे हैं, ताकि आपको इसका पूरा फायदा मिल सके। पैन में 1 कप पानी में 5-6 तुलसी के पत्तें, इलायची और अदरक को डालकर 3 मिनट तक उबालें। इसे छानकर गिलास में डालें और फिर इसमें 1 टीस्पून शहद व नींबू का रस मिलाकर पिएं।

इसका सेवन सर्दी-खांसी से ब्रोंकाइटिस और अस्थमा जैसी सांस संबंधी बीमारियों में
फायदेमंद होता है। यह खांसी से राहत दिलाती है और बलगम को बाहर निकालने में भी मदद करती हैं, जिससे सांस लेने में आसानी होती है।

शुगर लेवल कंट्रोल
नियमित दूध के बजाए तुलसी चाय पीएं क्योंकि यह शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करती है। तुलसी चाय का रोजाना सेवन कार्बो और वसा के मेटाबॉलिज्म को आसान बनाने में भी मदद कर सकता है, डायबिटीज मरीजों के लिए फायदेमंद है।

मजबूत इम्यून सिस्टम
रोजाना इस चाय का सेवन करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, जिससे आप कई वायरल और बैक्टीरियल बीमारियों से बचे रहते हैं। साथ ही इसमें कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जो कंजक्‍शन को दूर करने में मदद करते हैं।

तनाव से राहत
रिसर्च के अनुसार, तुलसी की चाय शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन के स्तर को सामान्य रखती है, जिससे तनाव नहीं होता। साथ ही स्ट्रेस होने पर इसकी चाय का सेवन करने से दिमाग तुरंत रिलैक्स हो जाता है, जिससे आप डिप्रेशन से भी बचे रहते हैं।

दांतों के लिए है बेहतर
इसमें मौजूद एंटी-माइक्रोबियल गुणों मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया और रोगाणुओं का खात्मा करते हैं, जिससे दांत स्वस्थ रहते हैं। इसके अलावा इससे मुंह से बदबू भी नहीं आती। आप इसे माउश फ्रेशनर के रूप में भी यूज कर सकते हैं।

बेहतर पाचन क्रिया
रोजाना इसका सेवन करने से पाचन क्रिया ठीक रहती है, जिससे आप कब्ज, एसिडिटी जैसी पेट की परेशानियों से बचे रहते हैं।

गठिया दर्द को करे कम
तुलसी में एंटी इंफ्लामेट्री व यूगेनॉल नामक एक घटक होता है, गठिया और अर्थराइटिस दर्द से राहत दिलाने में मददगार है।