जेल प्रशासन ने की वादाखिलाफी, बेरोजगारी की मार झेल रहे युवा, घर-परिवार चलाना हो रहा मुश्किल, आ गई सड़क पर आने की नोवत

इंडिया 2डे न्यूज(आपके-साथ) मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के दर्जनों युवा इन दिनों बेरोजगारी की मार झेल रहें हैं, जिनके घर पर खाने के लाले पड़ गए हैं, वह रोजी और रोटी दोनों के लिए मुहताज हो गए हैं, जिससे वह अब इन दिनों अपनी जिंदगी को एक तरफ कुआं तो वहीं दूसरी तरफ खाई की तरह समझ रहें हैं, अब ऐसे में ऐसे युवा सरकार से शीघ्र ही मदद की अपील कर रहें हैं, ताकि उनकी सुनवाई हो सके और वह वापस अपनी नोकरी कर सकें। दरअसल यह सभी दर्जनों की संख्या में बेरोजगारी की मार झेल रहे युवा मध्यप्रदेश जेल के तुगलकी फरमान की वजह से बेरोजगार हैं, जिनसे जुड़े घर व उनके परिवार भी मानों सड़क पर आ गए हैं, जिनको नोकरी पर रखे जाने का वादा करके जेल प्रशासन ने वादा खिलाफी कर दी है। इस संबंध का आरोप पीड़ितों ने लगाया है और शीघ्र ही उन्हें नोकरी पर वापस रखने की मांग करते हुए लॉक डाउन के उपरांत उग्र आंदोलन करने सहित अन्य आक्रामक कदम उठाए जाने की भी चेतावनी जेल प्रशासन को दी है।

इस संबंध में पीड़ितों ने बताया कि उच्च न्यायालय जबलपुर के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश की सभी सर्किल जेल, जिला जेल, सब जेल पर विचारधीन बंदियों की समस्त पेशियाँ वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से कराई जानी है। जेल मुख्यालय के पत्र क्र. 17062/आधुनिकीरण201/19 भोपाल दिनाक 28/12/2018 के माध्यम से सभी जेलों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए तकनीकी सुपरवाइजर(आऊट सोर्सिंग) के माध्यम से उपलबंध कराने के निर्देश दिए गये है। जेल मुख्यालय के पत्र क्र. 3043/आधुनिकीरण/19 भोपाल के द्वारा तकनिकी सुपरवाइजर नियुक्त किया गया है।
जेल विभाग के द्वारा दिनाक 28/01/2020 बिना सूचित किये 29/01/2020 को 126 पूरे म.प्र जेल के तकनीकी सुपरवाइजर(आउट सोर्सिंग) को जेल अधीक्षक के द्वारा भार मुक्त कर दिया, जिससे पूरे राज्य की जेलों के 126 तकनिकी सुपरवाइजर एकत्रित होकर जेल प्रशासन के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं।

 

जिसके चलते यह सभी जेल मुख्यालय के समक्ष अपनी बात रखने गये, तब मुख्यालय के अधिकारियो के द्वारा कहा गया कि वेंडर परिवर्तित होते ही तमाम लोगो को पुनः कार्य पर रखा जाएगा और पुनः उनका बकाया दो माह का वेतन भी जल्द से जल्द दिया जाएगा, जिसके लिए कभी हफ्ते भर, कभी 10दिन, कभी 15दिन का समय बोला गया, लेकिन अभी दो महीने बाद न ही उनको वेतन मिला और न ही उन्हें पुनः कार्य पर रखा गया। वहीं उन्होंने बताया कि वह सभी विभाग द्वारा दिए गए आश्वासन पर ही इतने समय से घर पर बैठे हैं जिससे वह सभी पूरी तरह से बेरोजगार तो हो ही गए हैं, साथ ही लॉक डाउन के कारण आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। जिससे समस्त तकनीकी सुपरवाइजर बहुत परेशान हैं और दाने-दाने को मोहताज हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *